Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 26 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 26

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 26
Shloka
प्रजनार्थं महाभागाः पूजार्हा गृहदीप्तयः। स्त्रियः श्रियश्च गेहेषु न विशेषोऽस्ति कश्चन॥

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Meaning
हे पुरुषो ! (प्रजनार्थं महाभागाः) सन्तानोत्पत्ति के लिए महाभाग्योदय करने हारी (पूजार्हाः) पूजा के योग्य (गृहदीप्तयः) गृहाश्रम को प्रकाशित करती, सन्तानोत्पत्ति करने-कराने हारी (गेहेषु स्त्रियः) घरों में स्त्रियाँ हैं वे (श्रियः) श्री अर्थात् लक्ष्मोस्वरूप होती हैं (विशेष: कश्चन न अस्ति) क्योंकि लक्ष्मी, शोभा, धन और स्त्रियों में कुछ भेद नहीं है॥२६॥(सं० वि० गृहाश्रम प्रकरण)