Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 259 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 259

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 259
Shloka
असम्यक्कारिणश्चैव महामात्राश्चिकित्सकाः। शिल्पोपचारयुक्ताश्च निपुणाः पण्ययोषितः॥

Bhashya

Meaning
(उत्कोचकाः) रिश्वतखोर, (औपधिकाः) भय दिखाकर धन लेने वाले (वञ्चकाः) ठग, (कितवाः) 'जूआ' से धन लेने वाले, (मंगलादेशवृत्ताः) 'तुम्हें पुत्र या धन प्राप्ति होगी' इत्यादि मांगलिक वातों को कहकर धन लेने वाले, (भद्राः) साधु-संन्यासी आदि भद्ररूप धारण करके धन लेने वाले, (ईक्षरिणकैः सह) हाथ आदि देखकर भविष्य बताकर वन लेने वाले, (असम्यक् कारिणः महामात्राः) धन, वस्तु आदि लेकर गलत तरीकों से काम करने वाले उच्च राजकर्मचारी [मन्त्री आदि], (चिकित्सका:) अनुचित मात्रा में धन लेने वाले या अयोग्य चिकित्सक (गिल्पोपचारयुक्ताः) अनुचित मात्रा में धन लेने वाले शिल्पी [ चित्रकार आदि], (निपुरणा: पण्ययोषितः) धन ठगने में चतुर वेश्याए (एवम् + आदीन्) इत्यादियों को (च) और (अन्यान्) दूसरे जो (प्रार्यलिङ्गिनः निगूढचारिण: अनार्यान्) श्रेष्ठों का वेश या चिह्न धारण करके गुप्तरूप से विचरण करने वाले दुष्ट या बुरे व्यक्ति हैं, उनको (प्रकाशान् लोककण्टकान् विजानीयात्) प्रकट लोककण्टक = प्रजाओं को पीड़ित करने वाले चोर समझे ।। २५८- २६०॥