Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 257 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 257

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 257
Shloka
प्रकाशवञ्चकास्तेषां नानापण्योपजीविनः। प्रच्छन्नवञ्चकास्त्वेते ये स्तेनाटविकादयः॥

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Meaning
(तेषाम्) उन दोनों प्रकार के चोरों में (नानापण्य-उपजीविनः प्रकाशवञ्चकाः) नाना प्रकार के व्यापारी जो देखते-देखते माप, तोल या मूल्य में हेराफेरी करके ठगते हैं वे 'प्रकट-चोर' हैं (ये) और जो (स्तेन प्राटविकादयः) जंगल आदि में छिपे रहकर चोरी करने वाले हैं (ते) वे (प्रच्छन्नवञ्चकाः) 'गुप्तचोर' हैं ॥२५७॥