Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 255 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 255

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 255
Shloka
निर्भयं तु भवेद्यस्य राष्ट्रं बाहुबलाश्रितम्। तस्य तद्वर्धते नित्यं सिच्यमान इव द्रुमः॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(यस्य बाहुबलाश्रितम्) जिस राजा के बाहुबल = दण्डशक्ति के सहारे (राष्ट्र निर्भयं तु भवेत्) राष्ट्र अर्थात् प्रजाएं [चौर आदि से] निर्भय रहती हैं (तस्य तत्) उसका वह राज्य (सिच्यमानः द्रुमः इव) सींचे गये वृक्ष की भाँति (नित्यं वर्धते) सदा बढ़ता रहता है ॥२५५॥