Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 254 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 254

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 254
Shloka
अशासंस्तस्करान्यस्तु बलिं गृह्णाति पार्थिवः। तस्य प्रक्षुभ्यते राष्ट्रं स्वर्गाच्च परिहीयते॥

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1 Bhashyas
Meaning
(यः तु पार्थिव:) जो राजा (तस्करान् प्रशासन्) चोर आदि को नियन्त्रित-दण्डित न करता हुआ (बलि गृह्णाति) प्रजात्रों से कर आदि ग्रहरण करता है (तस्य राष्ट्र प्रक्षुभ्यते) उसके राष्ट्र में निवास करने वाली प्रजाएं क्षुब्द होकर विद्रोह कर देती हैं (च) और वह (स्वर्गात् परिहीयते) राज्यसुख से क्षीण हो जाता है ॥२५४॥