Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 249 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 249

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 249
Shloka
यावानवध्यस्य वधे तावान्वध्यस्य मोक्षणे। अधर्मो नृपतेर्दृष्टो धर्मस्तु विनियच्छतः॥

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Meaning
(अवध्यस्य ववे) अदण्डनीय को दण्ड देने पर (नृपतेः) राजा को (यावान् + अधर्म: दृष्ट:) जितना अधर्म होना शास्त्र में माना गया है (तावान् वध्यस्य मोक्षणे) उतना ही दण्डनीय को छोड़ने में अधर्म होता है (विनियच्छतः तु धर्म:) न्यायानुसार दण्ड देना ही धर्म है॥२४९॥