Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 233 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 233

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 233
Shloka
तीरितं चानुशिष्टं च यत्र क्व चन यद्भवेत्। कृतं तद्धर्मतो विद्यान्न तद्भूयो निवर्तयेत्॥

Bhashya

Meaning
(यत्र क्वचन) जहां किसी मुकद्दमे में (तीरितम्) ठीक निर्णय दिया जा चुका हो (च) और (अनुशिष्टं भवेत्) किसो दण्ड का आदेश भी दिया जा चुका हो (धर्मतः तत् कृतं विद्यात्) धर्मपूर्वक किये उस निर्णय को पूरा हुआ जानना चाहिए (तत् भूयः न निवर्तयेत्) उस मुकद्दमे का पुनः निर्णय न करे [यह लोभ या ममत्व आदि के कारण अथवा अकारण निर्णय न करने का कथन है, कारण विशेष होने पर तो पुनः निर्णय का कथन किया गया है (८ । ११७; १ | २३४)] ॥२३३॥