Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 232 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 232

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 232
Shloka
कूटशासनकर्तॄंश्च प्रकृतीनां च दूषकान्। स्त्रीबालब्राह्मणघ्नांश्च हन्याद्द्विट्सेविनस्तथा॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(च) और (कूटशासनकर्तृन्) राजा के निर्णयों को कपटपूवक लिखने वाले, (प्रकृतीनां दूषकान्) प्रकृति-प्रजा, मन्त्री, सेनापति श्रादि राजकर्मचारियों को रिश्वत आदि बुरे कार्यों में फंसाकर बिगाड़ने वाले, (स्त्री-वाल-ब्राह्मणघ्नान् च) स्त्रियों, बच्चों और विद्वानों को हत्या करने वाले, (तथा) तथा (द्वि-सेविन:) शत्रु से मिलकर उसका भला करने वाले, इनको (हन्यात्) वध से दण्डित करे ॥२३२॥