Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 225 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 225

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 225
Shloka
कितवान्कुशीलवान्क्रूरान्पाषण्डस्थांश्च मानवान्। विकर्मस्थान्शौण्डिकांश्च क्षिप्रं निर्वासयेत्पुरात्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
और (कितवान्) जुआरियों, (कुशीलवान्) नाच-गाने से जीविका करने वाले. (क्र.रान्) क्रूर आचरण वाले, (पाखण्डस्थान्) ढोंग आदि रचकर रहने वाले, (विकर्मस्थान) शास्त्रविरुद्ध बुरे कर्म करने वाले, (शौण्डिकान्) शराब बनाने बेचने वाले, (मानवान्) इन मनुष्यों को (पुरात् क्षिप्रं निर्वासयेत्) राजा अपने राज्य से जल्दी से जल्दी बाहर निकाल दे॥२२५॥