Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 223 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 223

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
9/223
Adhyay 9 Shloka 223
Shloka
अप्राणिभिर्यत्क्रियते तल्लोके द्यूतं उच्यते। प्राणिभिः क्रियते यस्तु स विज्ञेयः समाह्वयः॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(अप्राणिभिः यत् क्रियते) बिना प्राणियों अर्थात् जड़ [ ताश, पासा, कौड़ी, गोटी आदि] वस्तुओं के द्वारा बाजी लगाकर जो खेल खेला जाता है (लोके तत् 'द्यूतम्' उच्यते) लोक में उसे 'हूत' = जूया कहा जाता है और (य: तु) जो (प्राणिभिः क्रियते) चेतन प्राणियों [मुर्गा, तीतर, बटेर, घोड़ा आदि] के द्वारा बाजी लगाकर खेला जाता है (स: 'समाह्वयः' विज्ञेयः) उसे 'समाह्वय' कहा जाता है॥२२३॥