Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 222 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 222

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 222
Shloka
प्रकाशं एतत्तास्कर्यं यद्देवनसमाह्वयौ। तयोर्नित्यं प्रतीघाते नृपतिर्यत्नवान्भवेत्॥

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(यत् देवन-समायौ) ये जो 'जा' और 'समाह्वय' हैं (एतत् प्रकाशं तास्कर्यम्) ये प्रत्यक्ष में होने वाली तस्करी = चोरी हैं (नृपतिः) राजा (तयोः प्रतीघाते) इनको समाप्त करने के लिये (नित्यं यत्नवान् भवेत्) सदा प्रयत्नशील रहे॥२२२॥