Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 216 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 216

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 216
Shloka
ऊर्ध्वं विभागाज्जातस्तु पित्र्यं एव हरेद्धनम्। संसृष्टास्तेन वा ये स्युर्विभजेत स तैः सह॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(विभागात् ऊर्ध्वं जातः तु) धन का बंटवारा करके [ पिता की जीवित अवस्था में ही ] पुत्रों के अलग हो जाने पर यदि कोई पुत्र उत्पन्न हो जाये तो (पित्र्यम् + एव धनं हरेत्) वह पिता के धन को ले (वा) अथवा (ये तेन संसृष्टाः स्युः) जो कोई पुत्र पिता के साथ सम्मिलित रूप में रह रहें हों तो (सः तैः सह विभजेत) वह उन सबके समान भाग प्राप्त करे॥२१६॥