Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 215 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 215

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 215
Shloka
भ्रातॄणां अविभक्तानां यद्युत्थानं भवेत्सह। न पुत्रभागं विषमं पिता दद्यात्कथं चन॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(अविभक्तानां भ्रातृरणां यदि सह उत्थानं भवेत्) सम्मिलित रूप में रहते हुए सब भाइयों ने यदि साथ मिलकर धन इकठ्ठा किया हो तो (पिता) पिता (कथम्चन पुत्रभागं विषमं न दद्यात्) किसी भी प्रकार पुत्रों के भाग को विषम अर्थात् किसी को अधिक किसी को कम रूप में न बांटे, सभी को बराबर दे ॥२१५॥