Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 214 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 214

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 214
Shloka
सर्व एव विकर्मस्था नार्हन्ति भ्रातरो धनम्। न चादत्त्वा कनिष्ठेभ्यो ज्येष्ठः कुर्वीत यौतकम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(विकर्मस्थाः सर्व एव भ्रातरः) जुआ खेलना, चोरी करना, डाका डालना आदि बुरे कामों में संलग्न रहने वाले सभी भाई (वनं न अर्हन्ति) धनभाग को प्राप्त करने के अधिकारी नहीं होते (च) और (कनिष्ठेभ्य: प्रदत्त्वा) छोटे भाइयों को विना दिये = बिना बांटे (ज्येष्ठ: यौतकं न कुर्वीत) बड़ा भाई अपने लिए पितृधन में से अलग से धन न ले ॥२१४॥