Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 208 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 208

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 208
Shloka
अनुपघ्नन्पितृद्रव्यं श्रमेण यदुपार्जितम्। स्वयं ईहितलब्धं तन्नाकामो दातुं अर्हति॥

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1 Bhashyas
Meaning
(पितृधनम् अनुपघ्नन्) पितृ-धन को बिल्कुल भी उपयोग में न लाता हुमा यदि कोई पुत्र (श्रमेण यत् + उपार्जितम्) केवल अपने परिश्रम से धन उपाजित करे तो (स्वयम् + ईहित- लब्धं तम्) अपने परिश्रम से संचित उस धन में से (दातुम् अकाम:) किसी भाई को कुछ न देना चाहे तो (न अहंति) न देवे अर्थात् देने के लिये वह बाध्य नहीं है ॥२०८॥