Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 207 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 207

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
9/207
Adhyay 9 Shloka 207
Shloka
भ्रातॄणां यस्तु नेहेत धनं शक्तः स्वकर्मणा। स निर्भाज्यः स्वकादंशात्किं चिद्दत्त्वोपजीवनम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(भ्रातृरणां यः तु स्वकर्मणा शक्तः) भाइयों में जो भाई अपने उद्योग से समृद्ध हो और (धनं न ईहेत) पितृधन का भाग न लेना चाहे तो (सः) उसको भी (स्वकात् + अंशात् किंचित् उपजीवनं दत्त्वा) अपने-अपने पितृधन के हिस्सों से कुछ धन देकर (निर्भाज्य:) अलग करना चाहिए, विल्कुल बिना दिये नहीं ॥२०७॥