Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 145 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 145

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 145
Shloka
हरेत्तत्र नियुक्तायां जातः पुत्रो यथाउरसः। क्षेत्रिकस्य तु तद्बीजं धर्मतः प्रसवश्च सः॥

Bhashya

Subject
नियोग से उत्पन्न क्षेत्रज पुत्र के दायभाग का विधान
Meaning
(तत्र नियुक्तायाम्) नियोग के लिए नियुक्त स्त्रो में (यथा + औरसः जातः पुत्रः) 'रस' = वैध पुत्र के समान उत्पन्न हुआ क्षेत्रज पुत्र (हरेत्) पितृधन का भागी होता है, क्योंकि (यत् क्षेत्रिकस्य बीजम्) वह क्षेत्रिक = क्षेत्रस्वामी का ही बीज माना जाता है, यतोहि (स: धर्मतः प्रसव:) वह धर्मानुसार नियोग से उत्पन्न होता है ॥१४५॥