Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 130 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 130

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 130
Shloka
यथैवात्मा तथा पुत्रः पुत्रेण दुहिता समा। तस्यां आत्मनि तिष्ठन्त्यां कथं अन्यो धनं हरेत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(यथा + एव आत्मा तथा पुत्रः) जैसी अपनी आत्मा है वैसा ही पुत्र होता है, और (पुत्रेण दुहिता समा) पुत्र जैसी ही पुत्री होती है (तस्याम्+आत्मनि तिष्ठन्त्याम्) उस आत्मारूप पुत्री के रहते हुये (अन्य: धनं कथं हरेत्) कोई दूसरा धन को कैसे ले सकता है ? अर्थात् पुत्र के प्रभाव में पुत्री ही धन की अधिकारिणी होती है ॥१३०॥