Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 112 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 112

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 112
Shloka
ज्येष्ठस्य विंश उद्धारः सर्वद्रव्याच्च यद्वरम्। ततोऽर्धं मध्यमस्य स्यात्तुरीयं तु यवीयसः॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(ज्येष्ठस्य विश: उद्धारः) पिता के धन में से बड़े भाई का बीसवां भाग 'उद्धार' [ = अतिरिक्त भागविशेष ] होता है (च) और (सर्वद्रव्यात् यत् वरम्) सब पदार्थों में से जो सबसे श्रेष्ठ पदार्थ हो वह भी, (ततः + अर्धम्) वड़े के 'उद्धार' से प्राधा उद्धार (मध्यमस्य) मझले भाई का अर्थात् चालीसवां भाग, (तुरीयं तु यवीयसः स्यात्) चौथाई भाग अर्थात् अस्सीवां भाग सबसे छोटे भाई का 'उद्धार' होना चाहिए ॥११२॥