Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 110 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 110

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 110
Shloka
यो ज्येष्ठो ज्येष्ठवृत्तिः स्यान्मातेव स पितेव सः। अज्येष्ठवृत्तिर्यस्तु स्यात्स संपूज्यस्तु बन्धुवत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(यः ज्येष्ठः) जो बड़ा भाई (ज्येष्ठवृत्तिः स्यात्) बड़ों अर्थात् पिता आदि के समान बर्ताव करने वाला हो तो (सः पिता + इव, सः माता + इव संपूज्य:) वह पिता और माता के समान माननीय है (यः तु) और जो (ग्रज्येष्ठवृत्तिः स्यात्) बड़ों अर्थात् पिता आदि के समान बर्ताव करने वाला न हो तो (सः तु बन्धुवत्) वह केवल भाई या मित्र की तरह ही मानने योग्य होता है ॥११०॥