Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 106 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 106

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
9/106
Adhyay 9 Shloka 106
Shloka
ज्येष्ठेन जातमात्रेण पुत्री भवति मानवः। पितॄणां अनृणश्चैव स तस्मात्सर्वं अर्हति॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
[ सम्मिलत रहते हुए] (ज्येष्ठः) बड़ा भाई (यवीयसः भ्रातृन्) अपने छोटे भाइयों को (पिता + इव पुत्रान्) जैसे पिता अपने पुत्रों का पालन-पोषरण करता है ऐसे (पालयेत्) पाले (च) और (ज्येष्ठे भ्रातरि) छोटे भाई बड़े भाई में(धर्मतः) धर्म से (पुत्रवत् + अपि वर्तेरन्) पुत्र के समान वर्ताव करें अर्थात् उसे पिता के समान मानें॥१०८॥