Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 104 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 104

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 104
Shloka
ऊर्ध्वं पितुश्च मातुश्च समेत्य भ्रातरः समम्। भजेरन्पैतृकं रिक्थं अनीशास्ते हि जीवतोः॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(पितुः च मातुः ऊर्ध्वम्) पिता और माता के मरने के पश्चात् (भ्रातरः समेत्य) सब भाई एकत्रित होकर (पैतृकं रिक्थं समं भजेरन्) पैतृक सम्पत्ति को बराबर-बराबर बांट लें (जीवतो: ते हि अनीशा :) माता-पिता के जीवित रहते हुए वे उस धन के अधिकारी नहीं हो सकते हैं ॥१०४॥