Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 91 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 91

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 91
Shloka
एकोऽहं अस्मीत्यात्मानं यस्त्वं कल्याण मन्यसे। नित्यं स्थितस्ते हृद्येष पुण्यपापेक्षिता मुनिः॥

Bhashya

Meaning
(कल्याण) हे कल्याण की इच्छा करने हारे पुरुष ! (यत् त्वम्) जो तू ('अहम् एकः अस्मि' इति) 'मैं अकेला हूँ' ऐसा (आत्मानं मन्यसे) अपने आत्मा में जानकर मिथ्या बोलता है सो ठीक नहीं है, किन्तु (एषः ते हृदि) जो दूसरा तेरे हृदय में (नित्यं पुण्यपापेक्षिता मुनिः स्थितः) अन्तर्यामीरूप से परमेश्वर पुण्यपाप का देखने वाला मुनि स्थित है, उस परमात्मा से डरकर सदा सत्य बोला कर ॥९१॥(स० प्र० षष्ठ समु०)