Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 84 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 84

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 84
Shloka
आत्मैव ह्यात्मनः साक्षी गतिरात्मा तथात्मनः। मावमंस्थाः स्वं आत्मानं नृणां साक्षिणं उत्तमम्॥

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Meaning
(आत्मन: साक्षी आत्मा + एव हि) आत्मा का साक्षी आत्मा (तथा + आत्मन: गति: + आत्मा) और आत्मा की गति आत्मा है, इसको जानके हे पुरुष ! तू (नृणाम् उत्तमं साक्षिणम्) सब मनुष्यों का उत्तम साक्षी (स्त्रम् + आत्मानम्) अपने आत्मा का (मा + अवस्था:) अपमान मत कर अर्थात् सत्यभाषण जो कि तेरे आत्मा, मन, वाणी में है वह सत्य, और जो इससे विपरीत है वह मिथ्याभाषरण है॥८४॥(स० प्र० षष्ठ समु०)