Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 75 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 75

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 75
Shloka
साक्षी दृष्टश्रुतादन्यद्विब्रुवन्नार्यसंसदि। अवाङ्नरकं अभ्येति प्रेत्य स्वर्गाच्च हीयते॥

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Meaning
(आर्यसंसदि) जो राजसभा वा किसी उत्तम पुरुषों की सभा में (साक्षी) साक्षी (दृष्ट श्रुतात् + अन्यत् वित्र वन्) देखने और सुनने से विरुद्ध बोले तो वह (अवाङ्नरकम् + अभ्येति) अवारक= अर्थात् जिह्वा के छेदन से दुःखरूप नरक को वर्तमान समय में प्राप्त होवे (च) और (प्रेत्य स्वर्गात हीयते) मरे पश्चात् सुख से हीन हो जाये॥७५॥(स० प्र० षष्ठ समु०)