Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 64 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 64

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 64
Shloka
नार्थसंबन्धिनो नाप्ता न सहाया न वैरिणः। न दृष्टदोषाः कर्तव्या न व्याध्यार्ता न दूषिताः॥

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Meaning
(अथसम्बन्धिन:) ऋण आदि के लेने-देन से सम्बन्ध रखने वाले साक्षी (न कर्त्तव्याः) नहीं हो सकते (न प्राप्ताः) न मित्र (न सहायाः) न सहायकनौकर आदि, (न वैरिणः) न अभियोगी के शत्रु आदि, (न दृष्टदोषा:) जिसकी साक्षी पहले झूठी सिद्ध हो चुकी है वे भी नहीं (न व्याधि + आत:) न रोगग्रस्त, और (न दूषिताः) न अपराधी = सजा पाये व्यक्ति साक्षी हो सकते हैं ॥६४॥