Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 59 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 59

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 59
Shloka
यो यावन्निह्नुवीतार्थं मिथ्या यावति वा वदेत्। तौ नृपेण ह्यधर्मज्ञौ दाप्यो तद्द्विगुणं दमम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(यः) जो कर्जदार (यावत् अर्थं निह्नवीत) जितने धन को छिपावे अर्थात् अधिक धन लेकर जितना कम बतावे (वा) अथवा जो कर्ज देने वाला (यावति मिथ्या वदेत्) जितना झूठ बोले अर्थात् कम धन देकर जितना ज्यादा बतावे (नृपेण) राजा (तो अधर्मज्ञी) उन दोनों झूठ बोलने वालों को (तत् द्विगुणं दमम् दाप्यौ) जितना झूठा दावा किया है उससे दुगुने धन के दण्ड से दण्डित करे ॥५९॥