Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 58 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 58

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 58
Shloka
अभियोक्ता न चेद्ब्रूयाद्बध्यो दण्ड्यश्च धर्मतः। न चेत्त्रिपक्षात्प्रब्रूयाद्धर्मं प्रति पराजितः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(अभियोक्ता न चेत् ब्रूयात्) जो अभियोक्ता = मुद्दई पहले मुकद्दमा दायर करके फिर अपने मुकद्दमे के लिए कुछ न कहे तो उसे (धर्मतः) धर्मानुसार (वध्यः) कारावास या सजा (च) और (दण्ड्यः) जुर्माना करने चाहिए, इसी तीन पखवाड़े अर्थात् डेढ़ मास तक (धर्म प्रति पराजितः) धर्मानुसार= प्रकार यदि (त्रिपक्षात् न चेत् प्रव्र यात्) अभियोगी अपनी सफाई में कुछ न कहे तो कानून के अनुसार वह हार जाता है॥५८॥