Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 57 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 57

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 57
Shloka
साक्षिणः सन्ति मेत्युक्त्वा दिशेत्युक्तो दिशेन्न यः। धर्मस्थः कारणैरेतैर्हीनं तं अपि निर्दिशेत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
('मे साक्षिण: सन्ति' इति + उक्त्वा) पहले 'मेरे साक्षी हैं' ऐसा कहकर साक्षी सके तो और फिर गवाही के समय न्यायाधीश के द्वारा ('दिश' इति + उक्तः) लामो ऐसा कहने पर (यः न दिशेत्) जो साक्षियों को पेश न कर (धर्मस्थ:) न्यायाधीश (एतैः कारणैः) इन कारणों के आधार पर भी (तमपि हीनं निर्दिशेत्) मुकद्दमा दायर करने वाले को पराजित घोषित कर दे ॥५७॥