Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 51 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 51

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 51
Shloka
अर्थेऽपव्ययमानं तु करणेन विभावितम्। दापयेद्धनिकस्यार्थं दण्डलेशं च शक्तितः॥

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Meaning
(अर्थे + अपव्ययमानम्) [जो कोई कर्जदार कर्ज लेकर ] कर्ज लेने से मुकर जाये (तु) और (करणेन विभावितम्) लेख, साक्षी आदि साधनों से उसका कर्ज लिया जाना निश्चित हो जाये तो (धनिकस्य अर्थ दापयेत्) महाजन का धन भी दिलवाये (च) और (शक्तित: दण्डलेशम) उसकी शक्ति के अनुसार कुछ जुर्माना भी करे ॥५१॥