Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 44 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 44

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 44
Shloka
यथा नयत्यसृक्पातैर्मृगस्य मृगयुः पदम्। नयेत्तथानुमानेन धर्मस्य नृपतिः पदम्॥

Bhashya

Meaning
(यथा) जैसे (मृगयु:) शिकारी (असृकुपात:) खून के धब्बों से (मृगस्य पदं नयति) हिरण के स्थान को प्राप्त कर लेता है (तथा) वैसे ही (नृपतिः) राजा या न्यायकर्त्ता (अनुमानेन) अनुमान प्रमाण से (धर्मस्य पदम्) धर्म के तत्त्व अर्थात् वास्तविक न्याय का (नयेत्) निश्चय करे॥४४॥