Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 43 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 43

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 43
Shloka
नोत्पादयेत्स्वयं कार्यं राजा नाप्यस्य पुरुषः। न च प्रापितं अन्येन ग्रसेदर्थं कथं चन॥

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Meaning
(राजा अपि + अस्य पुरुष:) राजा अथवा कोई राजपुरुष (स्वयं कार्यं न + उत्पादयेत्) स्वयं किसी झगड़े को उत्पन्न न करें अर्थात् स्वार्थ, लालच आदि के कारण किसी झगड़े को न पैदा करें, न बढ़ावें (च) और (अन्येन प्रापितम्) किसी वादी, प्रतिवादी द्वारा प्रस्तुत किये गये मुकद्दमे के (अर्थम्) वास्तविक न्याय को (कथंचन) किसी भी प्रकार अर्थात् स्वार्थ, लालच आदि के कारण (न ग्रसेत्) न दबावे = उपेक्षा न करे, सही न्याय करे॥४३॥।