Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 388 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 388

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 388
Shloka
ऋत्विजं यस्त्यजेद्याज्यो याज्यं च र्त्विक्त्यजेद्यदि। शक्तं कर्मण्यदुष्टं च तयोर्दण्डः शतं शतम्॥

Bhashya

Subject
(१४) (साहसम्) किसी कार्य को बलात्कार करना -
Meaning
(यः याज्य:) जो यजमान (कर्मणि शक्तं च अदुष्टम्) काम करने में समर्थ और श्रेष्ठ (ऋत्विजम्) पुरोहित को (त्यजेत्) छोड़ दे (च) और (याज्यं ऋत्विजः त्यजेत्) ऐसे ही यजमान को पुरोहित छोड़ दे तो (तयोः) उन दोनों को (शतं शतं दंड:) सौ सौ पण दंड करना चाहिए ||३८८॥