Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 357 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 357

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 357
Shloka
उपचारक्रिया केलिः स्पर्शो भूषणवाससाम्। सह खट्वासनं चैव सर्वं संग्रहणं स्मृतम्॥

Bhashya

Meaning
इन्द्रियासक्ति के कारण (उपचारक्रिया) एक दूसरे को आकर्षित करने के लिए माला, सुगन्ध आदि शृंगारिक वस्तुओं का आदान-प्रदान करना (केलिः) विलासक्रीड़ाएं=हंसी-मखौल, छेड़खानी आदि (भूषणवाससां स्पर्श:) आभूषण और कपड़ों आदि का स्पर्श [शरीर स्पर्श तो इसमें स्वतः ही परिगरिणत हो जाता है] (च) और (सह खट्वा+आसनम्) साथ मिलकर अर्थात् सटकर खाट आदि पर बैठना (सर्व संग्रहणं स्मृतम्) ये सब बातें 'संग्रहण' = विषयगमन में मानी गयी हैं॥३५७॥