Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 355 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 355

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 355
Shloka
यस्त्वनाक्षारितः पूर्वं अभिभाषते कारणात्। न दोषं प्राप्नुयात्किं चिन्न हि तस्य व्यतिक्रमः॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(य: तु पूर्वम् + अनाक्षारित:) किन्तु जो पहले ऐसे किसी अपराध में अपराधी सिद्ध नहीं हुआ है, यदि वह (कारणात् अभिभाषेत) किसी कारणवश बातचीत करे तो (किंचित् दोषं न प्राप्नुयात्) किसी दोष का भागी नहीं होता (हि) क्योंकि (तस्य न व्यतिक्रमः) वह कोई मर्यादाभंग नहीं करता ॥३५५॥