Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 351 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 351

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 351
Shloka
नाततायिवधे दोषो हन्तुर्भवति कश्चन। प्रकाशं वाप्रकाशं वा मन्युस्तं मन्युं ऋच्छति॥

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1 Bhashyas
Meaning
(आततायिवधे) दुष्ट पुरुषों के मारने में (हन्तुः कश्चन: दोषः न भवति) हन्ता को पाप नहीं होता (प्रकाश वा + अप्रकाशम्) चाहे अप्रसिद्ध [सबके सामने] मारे चाहे अप्रसिद्ध [ = एकान्त में] (मन्युः तं मन्यु ऋच्छति) क्योंकि क्रोधी को क्रोध से मारना जानो क्रोध से क्रोध की लड़ाई है॥३५१॥(स० प्र० षष्ठ समु०)