Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 350 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 350

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 350
Shloka
गुरुं वा बालवृद्धौ वा ब्राह्मणं वा बहुश्रुतम्। आततायिनं आयान्तं हन्यादेवाविचारयन्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(गुरु वा बाल-वृद्धौ वा) चाहे गुरु हो, चाहे पुत्र आदिक बालक हों, चाहे पिता आदि वृद्ध (ब्राह्मणं वा बहुश्रुतम्) चाहे ब्राह्मण और चाहे बहुत शास्त्रों का श्रोता क्यों न हो (आततायिनम् + प्रायान्तम्) जो धर्म को छोड़ अधर्म में वर्तमान, दूसरे को बिना अपराध मारने वाले हैं (अविचारयन् एव हन्यात्) उनको विना विचारे मार डालना अर्थात् मारके पश्चात् विचार करना चाहिए॥३५०॥(स० प्र० षष्ठ समु०)