Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 347 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 347

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 347
Shloka
न मित्रकारणाद्राजा विपुलाद्वा धनागमात्। समुत्सृजेत्साहसिकान्सर्वभूतभयावहान्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(न मित्रकारणात् वा विपुलात् धन + आगमात्) न मित्रता, न पुष्कल धन की प्राप्ति से भी (राजा) राजा (सर्वभूतभय + आवहान् साहसिकान्) सब प्राणियों को दुःख देने वाले साहसिक मनुष्य को (समुत्सृजेत्) बंधन-छेदन किये विना कभी छोड़े॥३४७॥(स० प्र० षष्ठ समु०)