Meaning
(यत्र) जिस अपराध में (अन्य: प्राकृतः जनः) साधारण मनुष्य पर (कार्षापणं दण्ड्यः भवेत्) एक पैसा दण्ड हो (तत्र) उसी अपराध में (राजा सहस्रं दण्ड्यः भवेत्) राजा को सहस्र पैसा दण्ड होवे अर्थात् साधारण मनुष्य से राजा को सहस्रगुणा दण्ड होना चाहिए । से मंत्री अर्थात् राजा के दीवान को आठ सौ गुणा, उससे न्यून को सात सौ गुरगा, और उससे भी न्यून को छः सौ गुरगा, इसी प्रकार उत्तर-उत्तर अर्थात् जो एक छोटे से छोटा भृत्य अर्थात् चपरासी है उसको आठ गुणे दंड से कम न होना चाहिए। क्योंकि यदि प्रजापुरुषों से राजपुरुषों को अधिक दण्ड न होवे तो रोजपुरुष प्रजापुरुषों का नाश कर देवें जैसे सिंह अधिक और वकरी थोड़े दण्ड से ही वश में आ जाती है, इसलिए राजा से लेकर छोटे से छोटे भृत्यपर्यन्त राजपुरुषों को अपराध में प्रजापुरुषों से अधिक दण्ड होना चाहिए॥३३६॥(स० प्र० षष्ठ समु०)