Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 335 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 335

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 335
Shloka
पिताचार्यः सुहृन्माता भार्या पुत्रः पुरोहितः। नादण्ड्यो नाम राज्ञोऽस्ति यः स्वधर्मे न तिष्ठति॥

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Meaning
(पिता आचार्य : सुहृत् माता भार्या पुत्रः पुरोहितः) चाहे पिता, आचार्य, मित्र, माता, स्त्री, पुत्र और पुरोहित क्यों न हो (यः स्वधर्मे न तिष्ठति) जो स्वधर्म में स्थित नहीं रहता (राज्ञः न+प्रदण्डचनाम) वह राजा का प्रदण्ड्य नहीं होता अर्थात् जब राजा न्यायासन पर बैठ न्याय करे तब किसी का पक्षपात न करे किन्तु यथोचित दण्ड देवे ॥३३५॥ (स० प्र० षष्ठ समु०)