Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 33 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 33

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 33
Shloka
आददीताथ षड्भागं प्रनष्टाधिगतान्नृपः। दशमं द्वादशं वापि सतां धर्मं अनुस्मरन्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(प्रष्ट + अधिगतात्) नष्ट या खोये धन के प्राप्त होने पर उसमें से (नृपः) राजा (सतां धर्मम् + अनुस्मरन्) सज्जनों के धर्म का अनुसरण करता हुआ अर्थात् न्यायपूर्वक [धन के स्वामी की अवस्था को ध्यान में रखकर ] (षड्भागं दशमम् अपि वा द्वादशम् आददीत) छठा, दशवाँ अथवा बारहवां-भाग करके रूप में ग्रहण करे॥३३॥