Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 318 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 318

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 318
Shloka
राजभिः कृतदण्डास्तु कृत्वा पापानि मानवाः। निर्मलाः स्वर्गं आयान्ति सन्तः सुकृतिनो यथा॥

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Meaning
(मानवा: पापानि कृत्वा) मनुष्य पाप = अपराध करके (राजभिः कृतदण्डा: तु) पुनः राजाओं से दण्डित होकर अर्थात् राजा द्वारा दिये गये दण्डरूप प्राय• श्चित्त को करके (निर्मला:) पवित्र = दोषमुक्त होकर (स्वर्गम् + आयान्ति) सुख को प्राप्त करते हैं (यथा सुकृतिनः सन्तः) जैसे अच्छे कर्म करने वाले श्रेष्ठ लोग सुखी रहते हैं। अभिप्राय यह है कि प्रायश्चित्त करने पर उस पापरूप अपराध के संस्कार क्षीण हो जाते हैं और दोषी होने की भावना नहीं रहती उससे तथा पुनः श्रेष्ठकर्मों में प्रवृत्ति होने से मनुष्य सन्तों की तरह मानसिक शान्ति-सुख को प्राप्त करते हैं ॥३१८॥