Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 317 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 317

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 317
Shloka
अन्नादे भ्रूणहा मार्ष्टि पत्यौ भार्यापचारिणी। गुरौ शिष्यश्च याज्यश्च स्तेनो राजनि किल्बिषम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(भ्र राहा अन्नादे माष्टि) भ्रूणहत्या करने वाला उसके यहां भोजन करने वाले को भी निन्दा का पात्र बना देता है अर्थात् जैसे भ्रूणहत्यारे को वुराई मिलती है वैसे ही उसके यहां अन्न खाने वाले को भी उसके कारण बुराई मिलती है (अपचारिणी भार्या पत्यौ) व्यभिचारी स्त्री की बुराई उसके पति . को मिलती है (शिष्य: गुरौ) बुरे शिष्य की बुराई उसके गुरु को मिलती है (च) और (याज्य:) यजमान की बुराई उसके यज्ञ कराने वाले ऋत्विक्गुरु को मिलती है (स्तेन: किल्विषं राजनि) इसी प्रकार दण्ड न देने पर चोर की बुराई राजा को मिलती है ॥३१७॥