Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 316 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 316

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 316
Shloka
शासनाद्वा विमोक्षाद्वा स्तेनः स्तेयाद्विमुच्यते। अशासित्वा तु तं राजा स्तेनस्याप्नोति किल्बिषम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(शासनात्) सजा पाकर (वा) या (विमोक्षात्) [ स्वयं प्रायश्चित्त करने के बाद] राजा के द्वारा क्षमा कर दिये जाने पर (स्तेन:) चोर (स्तेयात् विमुच्यते) चोरी के अपराध से मुक्त हो जाता है (तम् प्रशासित्वा तु) चोर को दण्ड न देने पर (राजा स्तेनस्य किल्विषम् प्राप्नोति) : राजा को चोर की बुराई मिलती है अर्थात् फिर प्रजाएं उस चोर के स्थान पर राजा को अधिक दोष देती हैं ॥३१६॥