Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 315 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 315

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 315
Shloka
स्कन्धेनादाय मुसलं लगुडं वापि खादिरम्। शक्तिं चोभयतस्तीक्ष्णां आयसं दण्डं एव वा॥

Bhashya

Meaning
(स्कन्धेन मुसलम् अपि वा खादिरं लगुडम्) चोर को कन्चे पर मुसल अथवा खैर का दंड, (उभयत: तीक्ष्णां शक्तिम्) दोनों ओर से तेज धारवाली बरछी (वा) अथवा (आयसं दण्डम् एव) लोहे का दंड ही रखकर [ राजा के पास जाना चाहिए और कहे कि 'मैं चोर हूं, मुझे दंड दीजिए']॥३१५॥