Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 314 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 314

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 314
Shloka
राजा स्तेनेन गन्तव्यो मुक्तकेशेन धावता। आचक्षाणेन तत्स्तेयं एवंकर्मास्मि शाधि माम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
[यदि चोर चोरी करने के बाद स्वयं उस अपराध को अनुभव कर लेता है तो उसके प्रायश्चित्त और उससे मुक्ति के लिए] (स्तेनेन) चोर को चाहिए कि वह (मुक्तकेशेन धावता) वाल खोलकर दौड़ता हुआ (तत् स्तेयम्+आचक्षाणेन) उसने जो चोरी की है उसको कहता हुआ 'कि मैंने अमुक चोरी की है, अमुक चोरी की है, ' आदि (राजा गन्तव्यः) राजा के पास जाना चाहिए, और कहे कि (एवंकर्मा + अस्मि) 'मैंने एसा चोरी का काम किया है' 'मैं अपराधी हूं' (मां शाधि) मुझे सजा दीजिए॥३१४॥