Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 311 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 311

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 311
Shloka
निग्रहेण हि पापानां साधूनां संग्रहेण च। द्विजातय इवेज्याभिः पूयन्ते सततं नृपाः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(हि) क्योंकि (पापानां निग्रहेण) पापी=दुष्टों को वश में करने और दण्ड देने से (च) तथा (साधूनां संग्रहेण) श्रेष्ठ लोगों की सुरक्षा करने से (नृपाः) राजा लोग (द्विजातयः + इव + इज्याभिः सततं पूयन्ते) जैसे द्विजवणं वाले यज्ञों से पवित्र होते हैं ऐसे ही पवित्र अर्थात् पुण्यवान् और निर्मल यशवान् होते हैं॥३११॥