Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 309 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 309

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 309
Shloka
अनपेक्षितमर्यादं नास्तिकं विप्रलुंपकम्। अरक्षितारं अत्तारं नृपं विद्यादधोगतिम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(अनपेक्षित मर्यादम्) शास्त्र क्त मर्यादा के अनुसार न चलनेवाले (नास्तिकम्) ईश्वर में अविश्वास करने वाले (विप्रलुम्पकम्) लोभ आदि के वशीभूत (अरक्षितारम्) प्रजाओं की रक्षा न करने वाले, और (अत्तारम्) कर आदि का घन प्रजाओं के हित में न लगाकर स्वयं खा जाने वाले (नृपम्) राजा को (अधोगति विद्यात्) नीच समझना चाहिए अथवा यह समझना चाहिए कि उसकी शीघ्र ही अवनति या पतन हो जायेगा ॥३०९॥