Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 306 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 306

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 306
Shloka
रक्षन्धर्मेण भूतानि राजा वध्यांश्च घातयन्। यजतेऽहरहर्यज्ञैः सहस्रशतदक्षिणैः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(धर्मेण भूतानि रक्षन्) धर्मपूर्वक = न्यायपूर्वक प्रजाओं की रक्षा करता हुआ (च) और (वध्यान् घातयन्) दण्डनीय या वध के योग्य लोगों को दण्ड या वध करता हुआ (राजा) राजा (अहः + ग्रहः सहस्र-शत-दक्षिणैः यज्ञैः यजते) यह समझो कि प्रतिदिन हजारों सैंकड़ों दक्षिणाओं से युक्त यज्ञों को करता है अर्थात् इतने बड़े यज्ञों जैसा पुण्यकार्य करता है॥३०६॥