Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 303 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 303

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
8/303
Adhyay 8 Shloka 303
Shloka
अभयस्य हि यो दाता स पूज्यः सततं नृपः। सत्त्रं हि वर्धते तस्य सदैवाभयदक्षिणम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(यः नृपः अभयस्य हि दाता) जो राजा प्रजाओं को अभय प्रदान करने वाला होता है अर्थात् जिस राजा के राज्य में प्रजाओं को चोर आदि से किसी प्रकार का भय नहीं होता (सः सततं पूज्यः) वह सदैव पूजित होता है-प्रजाओं की ओर से उसे सदा आदर मिलता है, और (तस्य) उसका (अभयदक्षिणं सत्रं हि) अभय की दक्षिणा देने वाला यज्ञ रूपी राज्य (सदैव वर्धते) सदा बढ़ता जाता है ॥३०३॥